- Astt. Professor Institute of Art and Humanities SAGE University Indore
वर्तमार्त मान समय में जब समा ज में नैतिनैतिकता , संवेसं दवे नशी लता और मूमूयों की गि रा वट प से देखी जा रही है,है ऐसे में
मूमूय-आधा रि त शि क्षा की आवयकता और प्रा संगिसंगिकता पहले से कहीं अधि क बढ़ गई है।है यह लेखले भा रत की
वर्तमार्त मान शि क्षा णा ली में नैतिनैतिक वि का स की भूमिभूमिका की समी क्षा करता है।है लेखले में मूमूय शि क्षा के उद्देयों ,
का र्या र्यावयन की स्थि ति , चुनौचुनौति यों और संभासं भावि त समा धा न पर वि तृततृ चर्चा की गई है।है यह अययन यह भी उजा गर करता है कि कि स का र समा वेशीवे शी, गति वि धि -आधा रि त और वहा रि क शि क्षा छा त्रों में नैतिनैतिक वि का स को बढ़ा वा दे सकती है।
